Saturday, 21 February 2015

महिला और दलित को अनिवार्य रूप से उप-(Deputy) का पद !

सेवा में,
माननीय प्रधान मंत्री, हिन्दुस्तान
माननीय राष्ट्रपति, भारत
दिनांक:-21 फरवरी 2015
विषय:-महिला या दलित को अनिवार्य रूप से देश के उप-(Deputy-) का पद देने के सम्बन्ध में ।
महाशयगण,
मजबूरीवश कहना चाहता हूँ महिला और दलित उत्थान के लिए हमारे संविधान में सैकड़ों प्रावधान है जिसे बेहतर बनाने के लिए लगातार संशोधित किया जाता है जिससे उनकी केवल आर्थिक स्तिथि आंशिक रूप से बेहतर होती है लेकिन सामाजिक, मानसिक और जैविक स्तिथि में असंतोषजनक बदलाव हीं देखने-सुनने के लिए मिलता है । बड़े बड़े पदों पर बैठे महिला और दलित भी अपने-आप को सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं इसका एक ताज़ा उदहारण बिहार में देखने को मिला जब बाहुबलियों ने एक दलित मुख्यमंत्री तक को मारने और सबक सिखाने की धमकी दी साथ उनके रिश्तेदारों की बर्बरतापूर्वक पिटाई भी की गयी लेकिन किसी अधिकारिक संस्थान ने स्वतः संज्ञान लेने की आवश्यकता नहीं समझी । उक्त घटनाओं से साफ़ पता चलता है कि उनकी स्तिथि बदलने में अभी भी सैकड़ों वर्ष लगेंगे और इतने वर्षों तक इन्हें प्रताड़ित होते देखना संवैधानिकता, सामाजिकता और नैतिकता कतई नहीं है ।
अतः श्रीमान् से प्रार्थना है कि चरणबद्ध तरीके से योग्यतानुसार महिला और दलित के लिए उप-राष्ट्रपति, उप-प्रधानमंत्री, उप-मुख्य न्यायाधीश (उच्च व उचत्तम न्यायलय) उप-राज्यपाल, उप-मुख्यमंत्री, उप-सचीव, उप-पुलिस महानिदेशक, उपाध्यक्ष व अन्य उप- (Deputy) का पद अनिवार्य रूप से आरक्षित करने का प्रावधान करने की कृपा की जाए ताकि देश की बहुत बड़ी आबादी देश की तरक्की के बारे में समानरूप से सोंच साथ हीं लोगों के अमानवीय बनने की प्रचलन पर विराम लगे ।    
प्रतिलिपि प्रेषित:-सभी गणमान्य प्राप्तकर्तागण ।
आपका
ह०/-प्रभाष चन्द्र शर्मा
पत्रकार (हिंदी दैनिक अखबार)
सचीव (जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ बिहार)
सलाहकार (ऑनलाइन सर्व शिकायत)
निदेशक (राजनीतिक कोचिंग संस्थान)
कार्यकर्ता (बिहार राज्य सुचना का अधिकार मंच)
कार्यकर्ता (बिहार मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान)
समाज सुधारक
पता:-पत्रकार सदन, पहलवान घाट, पटना-800001, बिहार (भारत)
ईमेल:-vikaschandrabudha@yahoo.co.in
आधार कार्ड संख्या:-338811430082
DARPG 21-2-15 Complaint Number-DARPG/E/2015/020072
President 21-2-15 Complaint Number-PRSEC/E/2015/016992
CM, Delhi 21-2-15 Complaint Number-GNCTD/E/2015/009612

CM, Bihar 21-2-15 Complaint Number-GOVBH/E/2015/001112



















Political Drama in Bihar

To,
The Prime Minister, Hindustan
The President, India
Date:-21 February 2015
Subject:-Regarding high-powered or judicial inquiry into threat and multiple violations alleged by Jitan Ram Manjhi
Sirs,
What happened in Bihar during & ahead of floor test & charges of J.R.Manjhi in PC on 20-2-15 has dented image of an ideal democratic country. J.R.Manjhi alleged irregularities in functioning of assembly & murder threat to supporters with him. Constitution+law appeared out of order which boozed mind of common men. So I pray you to order fortnightly high-power or judicial inquiry to nail guilty & restore faith in constitutional & legal provisions which are immortal. News is with-DARPG/E/2015/01996
I attach the new clip.
Regards
Sd/-Prabhash Chandra Sharma
Journalist (Daily Print Media)
Secretary (Journalists Union of Bihar)
Consultant (Online Multi-Complaint)
Director (Political Coaching Institute)
Activist (Bihar Right to Information Forum)
Activist (Bihar Human Rights Protection Foundation)
Social Reformer
R/o-Patrakar Sadan, Pahalwan Ghat, Patna, Bihar-800001 (India)
Email:-vikaschandrabudha@yahoo.co.in
AADHAAR No-338811430082
DARPG 21-2-15 Complaint Number-DARPG/E/2015/019962

President 21-2-15 Complaint Number-PRSEC/E/2015/016892

Thursday, 19 February 2015

सामूहिक बलात्कार की घटना सामाजिक नहीं शासकीय स्वार्थ का नतीजा !!!


सेवा में,
माननीय प्रधान मंत्री, हिंदुस्तान ।
माननीय राष्ट्रपति, भारत ।
दिनांक:-19 फ़रवरी 2015
विषय:-सामूहिक बलात्कार को अध्यादेश के जरिये कानून लाकर समाप्त करने के सम्बन्ध में ।
महाशयगण,
आप दोनों को बिहार, भारत में सभी तरह के अपहरण रोकने के लिए मुख्यमंत्री और डी०जी०पी० को अनिवार्य रूप से कमान संभालने सम्बन्धी 23, 25-1-2015 और 2, 6-2-2015 को भेजे गए पत्र पर आपके दखल का परिणाम है कि पिछले कुछ दिनों से अपहरण की घटनाओं पर अचानक रोक लगी है और अखबार में एक भी अपहरण सम्बन्धी समाचार पढने को नहीं मिला है जो इस बात को प्रमाणित करता है कि अपराध नियंत्रण तकनिकी, संवैधानिक या कोई अन्य विषय नहीं बल्कि जिम्मेदार अधिकारीयों की पसंद और नापसंद पर निर्भर करता है ।
लेकिन सामूहिक बलात्कार के आरोपियों का अनिवार्य स्पीडी ट्रायल और निर्धारित सजा के बाद सामूहिक बलात्कारियों का अनिवार्य रूप से नसबंदी कराना और उसके चेहरे, हाँथ या ललाट पर बलात्कारी शब्द का लिखना अधिकारीयों की पसंद या  नापसंद पर निर्भर नहीं करता है इसके लिए देश को कानून की आवश्यकता है । मैंने देश के प्रधान मंत्री को 8-11-2014 को एक पत्र लिखा था जिसमे उक्त मांग की थी और सम्बंधित मंत्रालय द्वारा उसपर विचार किया जा रहा था किन्तु आपके अध्यादेश के खिलाफ भाषण के बाद देश की आधी आबादी (महिला) के संतोषजनक सुरक्षा को जोरदार तमाचा और विराम लगा है ।
देश की पुलिस और प्रशासन व अन्य के शौक, पसंद, अस्तित्व और महत्व की सुरक्षा के लिए हम सामूहिक बलात्कार जैसी जघन्य अपराध को उस तरह की छूट नहीं दे सकते हैं जैसा की कुछ कट्टर देशों में दी जाती है और ना हीं हम अपने देश के संविधान की तुलना उन अमानवीय देशों की संविधान से करने की गलती कर सकते हैं जिसमें महिलाओं की तुलना किसी रैपर से की जाती है ।
अतः आपसे प्रार्थना है कि कम से कम देश की आधी आबादी (महिला) को जघन्य सामाजिक, मानसिक, शारीरिक, आर्थिक, मानवीय एवं संवैधानिक प्रताड़ना से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार को अध्यादेश के जरिये उक्त कानून लाने की अनुमति दी जाए क्योंकि आपका निजी सम्बन्ध भी किसी महिला से बाप, भाई, बेटा, पति, दादा और नाना का है । अखबार पढ़कर मुझे ऐसा लगता है की उक्त जघन्य अपराध मेरे हीं परिवार के साथ मेरे हीं घर में हो रहा है ।
अनुलग्नक;
1.     अखबार में एक दिन में छपी सामूहिक बलात्कार की अनेकों घटना और अमानवीय प्रतिक्रिया की छाया प्रति ।

प्रतिलिपि प्रेषित:-सभी माननीय प्राप्तकर्तगण
आपका
ह०/-प्रभाष चन्द्र शर्मा
पत्रकार (हिंदी दैनिक अखबार)
सचीव (जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ बिहार)
सलाहकार (ऑनलाइन सर्व शिकायत)
निदेशक (राजनीतिक कोचिंग संस्थान)
कार्यकर्ता (बिहार राज्य सुचना का अधिकार मंच)
कार्यकर्ता (बिहार मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान)
समाज सुधारक
पता:-पत्रकार सदन, पहलवान घाट, पटना-800001, बिहार (भारत)
ईमेल:-vikaschandrabudha@yahoo.co.in
आधार कार्ड संख्या:-338811430082

DARPG 19-2-15 Complaint Number-DARPG/E/2015/01890
President 19-2-15 Complaint Number-PRSEC/E/2015/01641
CM, Delhi 19-2-15 Complaint Number-GNCTD/E/2015/00912
CM, Bihar 19-2-15 Complaint Number-99999-1902150106

Wednesday, 18 February 2015

निवेश और शिक्षा के नाम गाढ़ी कमाई लुटने वाले कम्पनियों के विरुद्ध मेरी शिकायत के डेढ़ साल बाद जागी सुस्त और मस्त सरकार !


सेवा में,
माननीय प्रधान मंत्री, हिन्दुस्तान ।
दिनांक:-18 फ़रवरी 2015
विषय:-जीवन,भविष्य और रूपये से जुड़े आवश्यक और शीघ्र सुचना के लिए अनिवार्य हेल्पलाइन जारी करने के सम्बन्ध में ।
महाशय,
देशहित और लोकहित की असुरक्षा की जानकारी देते हुए विनती करना चाहता हूँ कि कुछ स्वार्थी, देशवासियों का बुरा चाहने वाले व्यक्ति देश और देश की विभिन्नता और विशालता का नाजायज़ फायदा उठाकर देश, देशवासियों का भविष्य और उनकी गाढ़ी कमाई को चपत लगते हैं ।
देशद्रोही विचारधारा के लोग इन्टरनेट के माध्यम से दिग्भ्रमित करने वाले सूचना और सन्देश भेजकर निर्दोष और सुलझे हुए लोगों के भविष्य और गाढ़ी कमाई से खिलवाड़ करते हैं । कभी-कभी निर्दोष जनता ऐसे सन्देश और विभिन्न संदिग्ध आश्वाशन की अधिकारिक जांच-पड़ताल करने की कोशिश भी करते हैं लेकिन घंटों में प्राथमिक-अधिकारिक सूचना देने वाली हेल्पलाइन प्रणाली के आभाव में भटक जाते हैं और ठगे भी जाते हैं जिसकी भरपाई करने की जिम्मेवारी देश का कोई भी अधिकारी लेने के लिए तैयार नहीं होता है और करवाई भी महज़ एक औपचारिकता होती है क्योंकि ऑनलाइन जानकारी और संवाद पर भरोसा नहीं करने का अलर्ट देश की सर्वोच्च संस्थाएं भी जारी करते रहती है जबकि दूसरी तरफ प्रधान मंत्री देश को इन्टरनेट के माध्यम से सन्देश व सुचना भेज कर लोगों को इन्टरनेट से जोड़ने का कार्य करते हैं जो जोखिम भरा हुआ है ।
कुछ ऐसा हीं वाक्या छात्रों और अभिवाकों के साथ किसी संसथान में नामांकन को लेकर होता है । तकनिकी शिक्षण संस्थाओं में नामांकन के वक़्त कॉलेजों में नामांकन करवाने वाले दलाल और कंसल्टेंट कुकरमुत्ते की तरह उग आते हैं और शिक्षण संस्थान के बारे में झूठी और अव्यवहारिक सूचना देकर छात्रों को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाते हैं लेकिन दलालों और कंसलटेंट की शिक्षण संस्थान सम्बन्धी ब्यौरा का घंटों में अधिकारिक जानकारी देने वाली हेल्पलाइन प्रणाली और पर्याप्त समय आभाव के कारण स्वयं हीं आधी-अधूरी एवं अनाधिकारिक जानकारी प्राप्त कर नामांकन लेने की जोखिम उठाते हैं और ज्यादातर लोग अपना भविष्य और रूपये दोनों बर्बाद कर बैठते हैं ।
ऐसी हीं समस्याएँ देश के मामूली निवेशकों के सामने भी आती है जिसको निवेश करने वाली कंपनियां  न्यूनतम निवेश पर निश्चित व अप्रत्याशित लाभ का वादा करती है जो कुछ हीं दिनों में खोखला साबित होता है साथ हीं निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई भी गवां बैठते हैं । ऐसा कंपनी और इसके क्रिय-कलाप के अधिकार और अनुमति के बारे में कम समय में अधिकारिक जानकारी देने वाली हेल्पलाइन के आभाव के कारण होता है । इस प्रकार की कंपनियां अक्सर अपनी और अपने कंपनी के क्रिया-कलापों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होने का दावा करते हैं जिस ऑनलाइन जानकारी को देश की सर्वोच्य संस्थायें भरोसेमंद नहीं मानती है । सरकारी वेबसाइट ऐसी किसी भी कंपनियों की केवल प्राथमिक जानकारी हीं दे पाती है निवेश की लाभ और सुरक्षा सम्बन्धी जानकारी नहीं दे पाती है जो अशिक्षित, अर्धशिक्षित और अंजान व्यक्ति के समझ से परे होता है । इस तरह की कंपनियां अक्सर अपने आप को केंद्र सरकार से सम्बद्ध और राज्य सरकार से अनापत्तित बताती है जिसकी जांच बिना किसी सरकारी हेल्पलाइन के कुछ घंटो और दिनों में संभव नहीं है । इन दिनों पटना, बिहार में एक कंपनी “दनार मल्टीनेशनल प्राइवेट लिमिटेड” मल्टी-लेवल-मार्केटिंग करने में बहुत हीं सक्रीय है जब मैंने इस काम को करने वाली टीम से पंजीयन संख्यां और एम० ओ० यु० की मांग की तो उनलोगों ऐसा करने से इन्कार कर दिया लेकिन वे लोग गैर जागरूक लोगों के बीच धड़ल्ले से काम कर रहे हैं । इस कंपनी की क्रिया-कलाप संबंधी जानकारी के लिए मैंने कॉर्पोरेट मंत्रालय, भारत सरकार को एक माह पहले एक आर० टी० आई० आवेदन भी दिया जिसके तहत सुचना आज तक आपेक्षित है । मैंने इस कंपनी की शिकायत भी कॉर्पोरेट मंत्रालय, भारत सरकार से की लेकिन महिना बीत जाने के बाद भी आज तक कोई करवाई नहीं की गयी है । इसी प्रकार पी० ए० सी० एल० इंडिया लिमिटेड नामक एक निवेश कंपनी है जिसने गरीब लोगों के रूपये निवेश किये लेकिन अचानक हीं कंपनी ने कार्य करना बंद कर दिया और सभी निवेशकों का रुपया अनिश्चितकाल के लिए फंसा हुआ है जिसकी शिकायत मैंने एक माह पहले प्रधान मंत्री से की लेकिन आज तक समाधान आपेक्षित है । निर्दोष व जानकारी-अभावग्रस्त देशवासियों के सामने इस प्रकार की अनेकों समस्याएँ आती है जिससे बचाव के लिए घंटों या दिनों में अधिकारिक जानकारी की आवश्यकता होती है, ऐसा नहीं होने पर लोगों के साथ सरकारी मशीनरियों के सामने भी बेवजह उत्पन्न समस्याओं और अपराधों का बोझ बढ़ता है ।
ऐसी समस्याओं से बचने और निबटने के लिए अतिशीघ्र एक ऐसे हेल्पलाइन की आवश्यकता है जो कम से कम समय में अहम व संवेदनशील जानकारी उपलब्ध करा सके और देश की गरीब और निर्दोष जनता को धोखेबाज संस्थाओं के जाल में फंसने से बचाया जा सके साथ हीं सरकारी मशीनरियों का बोझ भी कम किया जा सके ।
प्रतिलिपि प्रेषित:-मुख्यमंत्री, दिल्ली, बिहार व अन्य प्राप्तकर्तगण ।  
आपका
ह०/-प्रभाष चन्द्र शर्मा
पत्रकार (हिंदी दैनिक अखबार)
सचीव (जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ बिहार)
सलाहकार (ऑनलाइन सर्व शिकायत)
निदेशक (राजनीतिक कोचिंग संस्थान)
कार्यकर्ता (बिहार राज्य सुचना का अधिकार मंच)
कार्यकर्ता (बिहार मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान)
समाज सुधारक
पता:-पत्रकार सदन, पहलवान घाट, पटना-800001, बिहार (भारत)
ईमेल:-vikaschandrabudha@yahoo.co.in
आधार कार्ड संख्या:-338811430082

President 18-2-15 Complaint Number- PRSEC/E/2015/016122
DARPG 18-2-15 Complaint Number-DARPG/E/2015/018782
CM, Delhi 18-2-15 Complaint Number- GNCTD/E/2015/009032
CM, Bihar 18-2-15 Complaint Number- 99999-1802150121





Tuesday, 17 February 2015

मोबाइल और इन्टरनेट कंपनी द्वारा लूट को राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त


सेवा में,
माननीय प्रधान मंत्री, हिंदुस्तान
माननीय मुख्यमंत्री, दिल्ली
दिनांक:-17 फ़रवरी 2015
विषय:-मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियों द्वारा निर्दोष जनता से राष्ट्रव्यापी नंगी लूट रोकने के सम्बन्ध में ।
महोदय,
मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियों द्वारा राजनीतिक पार्टियों को फंडिंग और बदले में राजनीतिक पार्टियों द्वारा सरकार बनाने पर कंपनियों को लाभ पहुँचाने वाले निति और कानून बनाने के आरोप और इन्कार के वावजूद मैं आपको यह जानकारी देना और शिकायत करना और चाहता हूँ कि देश की कड़ोरों जनता मोबाइल फ़ोन का प्रयोग करती है और आपकी डिजिटल इंडिया के आहवाहन के बाद प्रतिदिन इन्टरनेट यूजर्स की संख्या बढती जा रही है जिससे मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियों की कमाई भी लगातार बढती जा रही है लेकिन इस सच्चाई और लाभ के वावजूद मोबाइल और इन्टरनेट कंपनिया वर्षों से महंगाई और गरीबी से जूझ रही जनता को लुटने में कोई कसार नहीं छोड़ रही है जिसका परिणाम है कि आज देश और दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपतियों में मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियों को चलाने वाले का नाम आता है । देश में कड़ोरों मोबाइल और इन्टरनेट उपभोक्ता हैं जिसके कम से कम एक रूपये की लूट से मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियां पलक झपकते कड़ोरों रूपये आमिर हो जाती है लेकिन एक रूपये की लूट के लिए जनता कंपनियों और दूरसंचार मंत्रालय से शिकायत नहीं करने चाहती है, वे हमेशा मोटी रकम की लूट की शिकायत करते हैं जिसका साफ़ मतलब है कि मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियां पलक झपकते कड़ोरों नहीं बल्कि अरबों-खरबों रूपये आमिर बनती है । मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियों की नंगी लूट केवल अनपढ़ और व्यस्ततम जिंदगी जीने वालों तक हीं सिमित नहीं है बल्कि वैसे लोगों तक भी है जो मोबाइल और इन्टरनेट का उपयोग सतर्कतापूर्वक करते हैं । मुझे आशा हीं नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियां देश के राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश प्रधान मंत्री, राज्यपाल, और मुख्यमंत्रीयों का भी जेब काटती होगी । सभी परेशान और ठगे गए लोगों के शिकायत करने पर भी कंपनियों द्वारा तैयार जवाब मिलता है की ग्राहक ने कॉल किया है या इन्टरनेट का उपयोग किया है जिसको जांच करने की फुल-प्रूफ तकनीक न तो ट्राई के पास है और ना हीं दूरसंचार मंत्रालय के पास है । ग्राहकों द्वारा दूरसंचार मंत्रालय को शिकायत किये जाने पर मंत्रालय सम्बंधित कंपनी से रटा-रटाया जवाब ले पाती है और उसे शिकायतकर्ता को बढ़ा कर शिकायत को रफा-दफा कर देती है जो इस बात को प्रमाणित करती है की सरकार जनता का नहीं बल्कि देश की कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए है । पार्टी और सरकार अपने निजी लाभ के लिए जनता को इस कदर मोबाइल ओर इन्टरनेट कंपनियों के वेश में लुटेरों का हाथों लुटते हुए नहीं देख सकती है । सरकार को बिजली कंपनियों के ग्राहकों की तरह मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियों के ग्राहकों को मोबाइल और इन्टरनेट उपयोग का स्वयं लेखा-जोखा रखने की तकनीक को जल्द से जल्द अनिवार्य बनाये ताकि खपत की जानकारी और शिकायत के लिए ग्राहकों को लुटेरों पर आश्रित नहीं रहना पड़े ।
अतः आपसे आशा है कि जल्द से जल्द महंगाई और गरीबी से जूझ रही जनता को लुटता नहीं देखकर मोबाइल और इन्टरनेट खपत की जांच के लिए कोई ठोस और कारगर तकनीक को अनिवार्य बनाते हुए मोबाइल और इन्टरनेट कंपनियों जैसे लुटेरों पर लगाम लगाने की कृपा करें ।  
प्रतिलिपि सभी माननीय प्राप्तकर्तागण ।
आपका
ह०/-प्रभाष चन्द्र शर्मा
पत्रकार (हिंदी दैनिक अखबार)
सचीव (जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ बिहार)
सलाहकार (ऑनलाइन सर्व शिकायत)
निदेशक (राजनीतिक कोचिंग संस्थान)
कार्यकर्ता (बिहार राज्य सुचना का अधिकार मंच)
कार्यकर्ता (बिहार मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान)
समाज सुधारक
पता:-पत्रकार सदन, पहलवान घाट, पटना-800001, बिहार (भारत)
ईमेल:-vikaschandrabudha@yahoo.co.in
आधार कार्ड संख्या:-338811430082
DARPG 17-2-15 Complaint Number-DARPG/E/2015/018242
CM, Bihar 17-2-15 Complaint Number-99999-1702150113
CM, Delhi 17-2-15 Complaint Number-GNCTD/E/2015/008732


Monday, 16 February 2015

किरायेदार बनाम मकान मालिक


सेवा में,
माननीय प्रधान मंत्री, हिंदुस्तान
माननीय मुख्यमंत्री, बिहार, दिल्ली ।
दिनांक:-16 फरबरी 2015
विषय:-किरायेदारों का चौतरफा शोषण रोकने के सम्बन्ध में ।
महाशयगण,
विनम्रता पूर्वक कहना है कि बिहार समेत अन्य राज्यों में मकान मालिकों की तुलना में किरायेदारों की संख्या संभवतः कई गुना अधिक है लेकिन उनकी अस्थिरता, असुरक्षा और आर्थिक व मानसिक शोषण के खिलाफ कोई कठोर, कारगर और व्यवहारिक कानून नहीं है और कुछ एक कानून का पालन नहीं होता है जिस कारण अधिकतर किरायेदारों को प्रतिदिन प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है  । किरायेदारों की स्तिथि व पहचान अस्पष्ट होने के कारण न केवल किरायेदार बल्कि सरकार के विभिन्न विभागों और आयकर विभाग को भी प्रति वर्ष भारी नुक्सान होता है । माकन मालिकों को ऐसी मनमानी छूट से अरबों-खरबों रूपये का लेन-देन बिना आयकर विभाग की जानकारी के होता है साथ हीं सरकारी राजस्व को प्रति वर्ष लाखों-कड़ोरों का चुना लगता है । दूसरी तरफ किरायेदार कानून, कहीं भी शांतिपूर्वक रहने जैसे मौलिक अधिकार, मानवधिकार सहित अन्य अधिकारों का बेशर्मी से उलंघन होता है और देश की इतनी बड़ी-बड़ी परिपक्क और संवेदनशील संस्थाएं लाचार एवं निकम्मी साबित होती है  
किरायेदारों के सामने प्रमुख समस्याएँ;
1.      बिना किसी अग्रीमेंट के किरायेदार बनने के लिए बाध्य करना ।
2.      बिना किसी निश्चित समय के किराया में बेशर्म बढ़ोत्तरी करना ।
3.      बिना किसी ठोस कारण और माकन मालिक की निजी अतिआवश्यकता के किरायेदार को मकान खाली करने के लिए बाध्य करना ।
4.      मनमाने ढंग से मकान खाली नहीं करने पर बिजली-पानी का सम्बन्ध विच्छेद करना ।
5.      किरायेदार की चल-अचल सम्पति को धुर्तातापुर्वक नुक्सान पहुँचाना ।
6.      असामाजिक तत्वों द्वारा किरायेदार व उनके परिवार को जगह-जगह अपमानित व परेशान करना ।
7.      किरायेदार और माकन मालिक के बीच अग्रीमेंट की ग्यारह महीने की न्यूनतम कानूनी बाध्यता का नाजायज लाभ उठाना ।
8.      बिना छह माह पूर्व सुचना के मकान खाली करने के लिए बाध्य करना ।
9.       तीन साल बाद अनिवार्य रूप से मकान खाली करने के लिए बाध्य करना ।
10.  बिना किरायेदार के लेख्य-प्रमाणित अनापत्ति पत्र के मकान खाली करने के लिए बाध्य करना ।  
11.  मकान मालिक और किरायेदार के विवाद के कारण तत्काल किरायेदारों को तुरंत मकान तलाशने में अपार असुविधा ।    
12.  व अन्य अनेको समस्याएँ ।

उक्त सभी समस्याओं के समाधान हेतु निम्नलिखित इत्यादि व्यवस्था ;

1.      बिना किसी अग्रीमेंट के किरायेदार बनाने पर प्रतिबन्ध व ज्ञात होने पर किरायेदार कानून उलंघन का मामला और आय कर चोरी का मोकदमा स्वतः दर्ज करने की व्यवस्था करना ।
2.      तीन वर्ष से पहले किराया बढ़ोत्तरी पर किरायेदार कानून के उलंघन के साथ ब्लैकमेलिंग व रंगदारी का मामला स्वतः दर्ज करने का प्रावधान किया जाए ।
3.      बिना किसी अतिआवश्यक्ता के मकान खाली कराने और इस बात की एक वर्ष के पूर्व प्रमाणित होने पर किरायेदार कानून के तहत स्वतः मोकदमा दर्ज करने के साथ जुर्माना के तौर पर बिजली चार्ज, भवन कर और जमीन कर में पच्चास प्रतिशत बढ़ोत्तरी के साथ हीं एल० पी० जी० सब्सिडी से मुक्त करने का प्रावधान कर किया जाए ।
4.      मकान मालिक द्वारा अनावश्यक कारणों से मकान खाली नहीं करवा पाने कि स्तिथि में बिजली-पानी का कनेक्शन काटने पर किरायेदार कानून के तहत मोकदमा दर्ज करने के साथ मौलिक एवं मानवाधिकार उलंघन का मोकदमा दर्ज एवं बिजली चार्ज, भवन कर और जमीन कर में पच्चास प्रतिशत बढ़ोत्तरी के साथ हीं एल० पी० जी० सब्सिडी से मुक्त करने का प्रावधान कर किया जाए ।
5.      किरायेदार द्वारा मकान खाली नहीं करने पर मकान मालिक द्वारा चल-अचल सम्पति को धूर्ततापूर्वक नुकसान पहुंचाने पर मकान मालिक द्वारा कानूनी रूप से छति-पूर्ति व उसी मूल्य का जुर्माना वसूली को अनिवार्य करने का प्रावधान बनाया जाए ।
6.      माकन मालिक के फरमान के बाद मकान खाली नहीं करने पर बाहुबली व असामाजिक तत्वों द्वारा किरायेदार को परेशान व अपमानित करने पर मकान मालिक को समानरूप से अभियुक्त बना कर स्वतः मोकदमा चलाने का प्रावधान कर किया जाए ।
7.      किरायानामा की न्यूनतम अवधी तीन साल का प्रावधान करना ।
8.      मकान मालिक द्वारा निजी अतिअवश्यकता प्रमाणित करने पर मकान खाली करने की नोटिस के लिए तीसवां महिना निर्धारित करना जिसे मकान मालिक द्वारा पूरा नहीं करने पर छतीसवें महीने तक का मुआवजा किसी होटल के सामान्य श्रेणी के किराया के हिसाब से भुगतान करने का प्रावधान किया जाए 
9.      बिना किसी निजी व निरंतर अतिआवश्यकता या किराया बढाने की नियत से तीन साल बाद किरायेदार बदलने और इसके प्रमाणित होने की स्तिथि में बिजली चार्ज, भवन कर और जमीन कर में पच्चास प्रतिशत बढ़ोत्तरी का प्रावधान कर दिया जाए साथ हीं एल० पी० जी० सब्सिडी से मुक्त कर दिया जाए । 
10.  बिना किरायेदार के लेख्य प्रमाणित अनापत्ति पत्र के मकान खाली करने पर किरायेदार कानून, आपराधिक मोकदमा के साथ बिजली चार्ज, भवन कर और जमीन कर में पच्चास प्रतिशत बढ़ोत्तरी के साथ हीं एल० पी० जी० सब्सिडी से मुक्त करने का प्रावधान कर दिया जाए ।
11.  मकान मालिक और किरायेदार के बीच उपजे विवाद के कारण किरायेदार को तुरंत किराया के लिए मकान नहीं मिलने की स्तिथि में सरकार द्वारा निर्मित एवं उपयुक्त भवन में सामान्य भुगतान पर तीन  से छह महीनों के लिए शरण देने का प्रावधान बनाया जाए ।
12.  व अन्य उपयुक्त प्रावधान    
अतः आपसे प्रार्थना है की अपनी-अपनी जवाबदेही, क्षमता और क्षेत्राधिकार को गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए उपर्युक्त सुझावों को समुचित व इमानदार प्रयासों के पश्चात जल्द से जल्द लागु किया जाए ।

आपका
ह०/-प्रभाष चन्द्र शर्मा
पत्रकार (हिंदी दैनिक अखबार)
सचीव (जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ बिहार)
सलाहकार (ऑनलाइन सर्व शिकायत)
निदेशक (राजनीतिक कोचिंग संस्थान)
कार्यकर्ता (बिहार राज्य सुचना का अधिकार मंच)
कार्यकर्ता (बिहार मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान)
समाज सुधारक
पता:-पत्रकार सदन, पहलवान घाट, पटना-800001, बिहार (भारत)
ईमेल:-vikaschandrabudha@yahoo.co.in
आधार कार्ड संख्या:-338811430082
CM, Bihar 16-2-2015 BPGRS Complaint Number- 99999-1602150113
DARPG 16-2-2015 Complaint Number- DARPG/E/2015/017862
CM, Delhi 16-2-2015 Complaint Number- GNCTD/E/2015/008362